
बालपना में उडा दीयो,
बाबो हवा में घोडलीयो,
दरजी सोचे कठे गयो,
हवा में घोडलीयो,
घोडलीयो रामदेवजी रो,
तर्ज – लाल दुपट्टा उड़ गया रे।
रंग रंगीलो कपडे वालो,
मनडे भायो घोडलो,
दरजी मन में खोट लायो,
कपडे वालो घोडलो,
मैणादे घोडो मंगवायो,
रामा धणीया ने मन भायो,
झटपट पकड़ लगाम उडायो,
लालच किनो दरजी मन में,
परचो दीनो बापजी,
जादू टोनो करके लायो,
कैद कियो अजमाल जी,
दरजी मनडा मे घबरायो,
खोटा कर्मा पर पछतायो,
तीन लोक में घूम के आयो,
गाँव रूनीचे रामदेव रो,
साचो बनीयो देवरो,
इन कलयुग रे मायने,
दीन दुखी रो आसरो,
बाबो है साचो अवतारी,
परचा है न्यारा हद भारी,
दास अशोक सुनावे लीला,
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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