
बिरथा में अपन माला डार रहे
का हो वोतो पापियन को तार रहे
खर-दूषण धरती पर कितनो अत्त कये थे
जन्म जात बीज वे तो पाप ही को बये थे
राम राम राम राम राम राम राम राम
राम राम अपने वोइ तार रहे
दुराचारी राजा किष्किंधा को बाली
भगा दयो भइया को छीनी घरवाली
मर्यादा अपनी वो बिगार रहे
जान जान उनने जनक नंदनी हरी थी
हतो न भरोसो उन्हें अपनी पड़ी थी
भार भूमि कहवे का उतार रहे
देखो तो उनने कंस शिशुपाल तारो
हिरनाकुस को देखो कौन जतन मारो
काहो हम उनको का बिगार रहे
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.

