
बिरा राम नाम गुण गावो रे,
अवसर आयो हाथ,
मुफत में मत गमावो रे,
लख चोरासी भटकत भटकत,
मुश्कील मोको आयो,
सत पुरूषा का साथ करो,
गफलत न दुर हटावो जी,
घणा दिना तक सो लिया वीरो,
अब तो नींद उडावो,
सूरा होय मोरचा न रोको,
मत ना पीठ दिखाओ जी,
दुतीया दुख की बेलडी है,
ईन काट बगावो,
संगत अपना साचा साथी,
का संग प्रेम बडावो जी,
बुद्धि बन्दूक लेवो कर माही,
विधा बारूद भरावो,
पोल पंथ का खोज उडाकर,
सत का राज जमावो जी,
समय अमोलक रत्न जगत में,
मोड न पाछी आवे,
खीव कहे करणी सो अब कर,
देर कर्या पछताव जी,
प्रेषक – सिंगर विनोद कुमार
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