
भक्ति करते छूटे मेरे प्राण
भक्ति करते छूटे मेरे प्राण
प्रभु / हरि जी, यही मांगूँ रे ॥
रहे जनम, जनम तेरा ध्यान,
तेरी भक्ति मे, खुद को, मिटाता चलूँ ।
तेरी महिमा, निरंतर, सुनाता चलूँ ॥
तेरा गाऊँ, सदा गुण गान,
प्रभु जी, यही मांगूँ रे...
तेरा मुखड़ा, मनोहर मैं, देखा करुँ ।
आठों याम, भजन तेरा, बोला करुँ ॥
रहे, अंत समय, तेरा ध्यान,
मेरी आशा, निराशा, करना नही ।
मेरे अवगुण, ह्रदय में, धरना नही ॥
रटूँ स्वाँस, स्वाँस तेरा नाम,
मेरे पाप, और ताप, मिटा देना ।
मुझको, चरणों का सेवक, बना लेना ॥
छूटे, काम क्रोध, और मद मान,
काल माया के, झूले में, झूलूँ नहीं ।
निस दिन तेरे, चरणों को, भूलूँ नहीं ॥
दाता देना, यही वरदान,
अपने, दासों का, दास बना लो मुझे ।
अपने, चरणों में, नाथ जगह दो मुझे ॥
देना, आ कर, दर्शन दान,
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