
भजन चलता रहे,
मगन मनवा रहे,
आनंद बढ़ता रहे,
देखो सिया राम सिया राम सिया राम सिया राम हरी नाम गा,
सिया राम सिया राम सिया राम सिया राम हरी नाम गा,
ये भजन जिसने होकर मगन है किया,
हो गया वो अमर उसने अमृत पिया,
उसको शिकवा ना कोई शिकायत रही,
उसने नर देह पाने का फल पा लिया,
हरी बोल हरी बोल हरी बोल,
अगम संसार है,
विषम व्यवहार है,
सुगम बस नाम है,
राम जी के भजन में तो बल है बड़ा,
द्वार सबरी के चल कर के आना पड़ा,
राम जी के भजन में वो बल है बड़ा,
जिसके बल पे था प्रभु से केवट अड़ा,
अपने चरणों को उनको धुलना पड़ा,
भरम मिट जायेंगे,
करम खिल जायेंगे,
अधम तर जायेंगे,
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