
तुझे बिन सुना है कैलाश,
शिव धुंध्धे जोगी बनकर रे,
मन भी जाओ गौरा रानी,
रूठी क्यू हो शंकर,
भोले बोले पार्वती से....
गौरा चलो कैलाश में,
तेरे बिन मोरा जिया नहीं लगे,
महल मिले ना रहने को,
मेरा प्रेम मिले भरपुर,
नंदी को लाया संग अपने,
मेरा डेरा है बड़ी दूर,
जहां दासो दिशा मिलन करे,
नित्त ठंडी ठंडी पवन बहे,
बाराफो के महल बनाकर,
बैठा खुले आकाशो में....
महल न चाहू रहने को,
तुम सदा मेरे संग,
लीन ध्यान में रहते हैं,
या बहे जट्टा से गैंग,
तेरे गले में वास भुजंग करे,
तेरे भूत प्रेत मुझे तंग करे,
तेरा रुद्ररूप भभित करे,
मैं नी जनना कैलाशो में.....
शंभु बोले पार्वती से,
हिंदी · Read on Bhajan Baan
Share this bhajan with your family
Send it to your satsang group before kirtan so everyone has the words.
