
मतलब के रिश्तों को तोड़ के,
प्यार की चाहत में,
मैं आया तेरे दरबार,
हर झूठ के रिश्ते से,
सही है, तुमसे नाता श्याम,
ये दिल से कहुं सरकार,
तर्ज – नफ़रत की दुनिया को छोड़ के।
अब सांवरे तुमसे,
एक बात कहनी है,
कब तक मुझे जग में,
हर घात सहनी है,
हर आदमी का आज बना है,
दुश्मन खुद इंसान,
ये कहता खुद संसार,
आंखें कहे दिल की,
जब लब खामोश हो,
ग़म छलके आंखों से,
जब दिल में रोष हो,
यहां कौन सुने मेरी सिवा अब,
तेरे लखदातार,
ये तुमसे कहूं करतार,
समझो सदा बाबा,
“जालान” को अपना,
ना टूटे बस मेरे,
ये जीवन का सपना,
आता रहूं मैं दर पे सदा ही,
ग्यारस को दरबार,
ये करम करो दातार,
– भजन रचयिता –
पवन जालान जी।
94160-59499 भिवानी (हरियाणा)
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