
महाकाल के दरबार में सब लोगों का खाता लिरिक्स महाकाल के दरबार में सब लोगों का खाता
उज्जैन के दरबार में सब लोगों का खाता
जिसने जैसा कर्म किया है वह वैसा फल पाता
महाकाल के दरबार में सब लोगों का खाता
क्या साधु क्या संत गृहस्थी क्या राजा क्या रानी
शिव की बही में लिखी हुई है सबकी कर्म कहानी
बड़े-बड़े वह जमा खर्च का सही हिसाब लगता
मेरे बाबा के दरबार में सब लोगों का खाता
नहीं चले उसके घर रिश्वत नहीं चले चालाकी
शिव की अपनी लेनदेन की रीत बड़ी है बाकी
पुण्य की नैया पार करे वो पाप की नाव डूबाता
करता वही हिसाब सभी का शिव आसन पर डटके
उनका फैसला कभी ना बदले लाख कोई सर पटके
समझदार तो चुप रहता है मूरखशोर मचाता
ऐसे ही सुन्दर भजन आप निचे दी गयी सूचि में देख सखते है
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