
वैष्णो आसरे तेरे मेरा परिवार पलता है,
तेरे ही नाम से माता मेरा हर काम चलता है,
अम्बे माँ आसरे तेरे मेरा परिवार पलता है.....
कृपा की मूर्ति तुम हो, सदा ये सुनता आया हूँ,
दया मुझपे तेरी होगी, ये ही विश्वास लाया हूँ,
थाम लेती माँ गिरतों को, भक्त तेरा सम्भलता है,
इक दाती तू ही है माता, ये सारा जग भिखारी है,
शरण में तेरी जो आये, कटे उसकी बीमारी है,
मेरे ह्रदय में तेरे नाम, का बस दीप जलता है,
माँ भक्ति में जो लग जाये, जगे तकदीर भी सोई,
ठीक हूँ तेरी छाया में, मुझे चिन्ता नही कोई,
तेरा दर्शन जो मिल जाये, पाप मन से निकलता है,
कई भक्तो के घर आई, मेरे घर में भी आ जाओ,
यहाँ जो रूखा सुखा है, प्रेम से बैठ के खाओ,
कहे भूलन माँ चाहे तो, बड़ा संकट भी टलता है,
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