
मुकट सिर स्वर्ण का मेरे ग़ज़ा नन्द का,
माँ गोरा के ये लाल है देव ये कमाल है……….
भगतो को गज मुख इनका रूप सुहाया है,
सब देवो ने इनका गुणगान गाया है,
मुशक असवार है ये सांचे अवतार है,
इक दंत दया वणता चार भुजा धारी है,
माथे पे तिलक सुहाहे भप्पा दातारि है,
प्रमथ तेरा नाम है ये सांचे भगवान है,
रिद्धि सीधी बल और भुधि के ये प्रदाता है,
सुख करता दुःख के हरता धन धान दाता है,
जो हिर्दय में धार ले तो भव से ये तार दे,
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