
मुझे गम नहीं इस बात का,
साया भी ना मेरे संग हैं,
मुझे गर्व है इस बात का,
मेरा सांवरा मेरे संग हैं,
तर्ज – तू प्यार है किसी ओर का।
सुख हो दुख चाहे हस के सहता हूँ,
जैसे रखता ये वैसे रहता हूँ,
जो भी दिल में हो इनसे कहता हूँ,
ये जहां करे मुझे तंग हैं,
श्याम की मुझपे छत्र छाया हैं,
आज जो भी हूँ इसकी माया है,
मेरी नस नस में ये समाया हैं,
हर रंग भी बदरंग है,
प्रेम की भाषा ये समझता है,
मेरे भावो को ये ही पढता है,
मेरी खातिर ये सबसे लड़ता है,
जीवन कटी सी पतंग है,
सोचता हूँ मैं मुझमे क्या देखा,
पल में बदला है भाग्य का लेखा,
‘मोहित’ संवरी है कर्मो की रेखा,
मुझे देख के सब दंग है,
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