
मेरी ज़िंदगी सजा के अपना बना लिया
मेरी ज़िंदगी सजा के अपना बना लिया,
आँखों आँखों में श्याम ने दिल को लुभा लिया ।
दिल आज ख़ुशी से गाये ये पहला नहीं समाये ।।
अपने प्यारे प्रीतम को ये झूम झूम बेहलाये,
मुझको मस्ती में श्याम ने जीना सीखा दिया ।
मस्ती का रंग निरला इसे समजे किस्मत वाला,
मुरली मोहन की बाजी मेरे मन में हुआ उजाला ।
मुझको तो अपने प्यार की चुनड़ उडा गया,
मेरे मन में लग्न लगी है आशा परवान चढ़ी है,
सेवा प्रभु की करनी है ये सेवा बहुत बड़ी है ।
नंदू सेवा सरकार की बड़भागी पा गया,
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