
मेरी माई दीयां लाल चुन्नियां
उत्ते, लग्गिया, सुनहरी गोटा ॥
मां दे, मंदिरां ते, रंग बरसे,
आ जाओ, रहमतां दा, भर लो लोटा ॥
सच्चे सुच्चे, मनो आज, जोत जगा लवो ।
मन चित्त, आज मां दे, चरणां नाल ला लवो ॥
सच्ची, श्रद्धा नूं, फल लग्गणे,
नहियों, तरना जो, दिलों होया खोटा...
हर साल, लग्गे चिंता, पुरणी दा मेला ।
सावण दा, महीना आवे, खुशियां दा वेला ॥
सारे, हस्स के, चढ़ाइयां चढ़दे,
भावें, होवे पतला जां, कोई मोटा...
हुण्दा ऐ, नितारा एथे, हक अते सच्च दा ।
बोलिया, जैकारा रत्ता, मूह नहियों थक्दा ॥
तर, जांदे, मढ़ारां दर ते,
बण, जांदा ऐ, कलियां तो जोटा...
अपलोडर – अनिलराममूर्ति भोपाल
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