
मेरे नैनो में बस जाओ मेरे गोपाल गिरधारी
मेरे नैनो में बस जाओ,
मेरे गोपाल गिरधारी,
झलक अपनी दिखा जाओ,
तर्ज – जगत के रंग क्या देखूं।
तमन्ना एक है मेरी,
तुम्हारा दर्श पाने की,
चमन मन का खिला जाओ,
तेरे दीदार की हसरत,
तेरे दरबार ले आई,
दरश नैनो को दे जाओ,
सुना है प्रेमियों के दिल की तुम,
हर बात सुनते हो,
करम ‘शर्मा’ पे कर जाओ,
गायिका – कंचन तिवारी।
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