
मेरे बाबा ने इतना दिया है,
खुशियों से मेरा घर भर दिया है,
मेरे बाबा ने ईतना दिया है।।
अब तो गई मेरी सारी उदासी,
कमी भी ना खटकी कही पे जरा सी,
चरणों में जबसे शीश झुका है,
नजरे टिकी ऐसी चोखट पे मेरी,
कभी मुझसे बाबा ने नजरे ना फेरी,
नजरों ने इतना असर किया है,
स्वर – प्रमोद त्रिपाठी जी।
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