
मेरे बाबा भोले नाथ सब देवो में देव निराले,
अंग पे राख जमा ली और जटा से बेहवे गंगा,
लगा समादि बैठ गये और माथे सोहे चंदा,
देखो गले में जुल रहे कैसे नाग ये काले काले,
हुआ समंदर मंथन उसमे अमिरत ज़हर निकला,
देख देव सब गबराये बाबा पी गये विष का प्याला,
तब से नील कंठ हुआ नाम ये है भगतो के रखवाले,
शिव के जैसा देव नहीं है दुनिया में माँ दूजा,
दानव देव सभी करते है शिव भोले की पूजा,
ये है दानी देव महान इनसे जो चाहो वर पा ले,
अरे गंगा जी में गोते लगा के कंधे कावड़ उठा ले.
शिव भक्ति से खुल जावन गे तेरे बंद किस्मत के ताले,
करले सुमिरन सुबहो शाम सोनू बम बम बम गा ले,
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