
मै तो हवा हूं किस तरह पहरे लगाओगे लिरिक्स अब कहां हूं कहां नहीं हूं मैं
जिस जगह हूं वहां नहीं हूं मैं
कौन आवाज दे रहा है मुझे
कोई कह दे के यहां नहीं हूं मैं
क्योंकि मैं हवा हूं कहां वतन मेरा
दस्त मेरा ना चमन मेरा
वर्ग गुल पर चराग सा क्या है
छू गया जिसे दहन मेरा
मैं तो हवा हूं किस तरह
पहरे लगाओगे
महसूस ही करोगे
मुझे छू ना पाओगे
कागज की इस लिबाज को
बदन से उतार दो
क्योंकि पानी बरस गया तो
किसे मुंह दिखाओगे
दुख क्यों किसी गरीब का
हसते हो देख कर
करवट जो वक्त लेगा
तो सब भूल जाओगे
मैं ना रहूंगा एक दिन
ऐसा भी आएगा
क्योंकि मैं जो मैं कहता हूं
कि मैं ना रहूंगा क्योंकि
मैं मैं ही नहीं हूं तो कहां से रहूंगा?
मैं ही नहीं हूं तो कहां से रहूंगा?
कहा जाता है कि मैं खाने में बैठे हैं
और मैं को ही तरसते हैं।
माहौल है फूलों का पर पत्थर से बरसते हैं।
हम ना रहेंगे एक दिन
तस्वीर को गले से मेरी
तुम लगाओगे।
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