
श्री बालाजी सरकार है मेहंदीपुर दरबार है
श्री बालाजी सरकार है, मेहंदीपुर दरबार है ।
मन की अख्खियाँ खोल के देखो, यह सच्चा दरबार है ।।
सीताराम सहायक जिनके, और अंजनी माई है,
आगे भैरव सेवा करते, कोतवाल ठकुराई है ।
लीला बड़ी अपार है, भूतों को पड़ती मार है,
प्रेतराज मंदिर के पीछे, जो जन अरज़ लगाते हैं,
सुनते हैं वो सबकी विनती, फौरन हुक्म सुनाते हैं ।
जिन्नों ने मान ली हार है, भूत बड़े लाचार हैं,
भोले बाबा हैं भंडारी, उनसे अरज़ हमारी हैं,
दो हमको सत्य ज्ञान मिटा दो, सबके दुःख त्रिपुरारि हैं ।
घाटा रहे गुलज़ार है, भक्तों का बेड़ा पार है,
सेवक महंत गणेश गुणीले, हनुमत प्रेम रंगीले रे,
आओ सब मिल प्रेम मगन हों, चरणामृत रस पी ले रे ।
बदकार रहे मँझधार हैं, संकट उतरे पार हैं,
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