
मैं तेरी और चलता रहा
मेरी सुन के सदा वो दौड़ा आएगा मुझे अपने गले से वो लगाएगा,
मेरी हार में वो जीत बन जाएगा मेरा साथी मेरा साथ वो निभाएगा,
मैंने खाव्ब जो सजाये मेरे सँवारे पुरे करने है सारे बस जान ले,
मेरा साथी है तू बस यही मान ले मैं तेरी और चलता रहा,
मेरी जिंदगी का तू ही एहसास है ऐसा लगता तू हर दम साथ है,
मैंने जब जब कहा मेरे पास है मैं तेरी और चलता रहा,
जूठी निकली जहां की हर रीत रे,
झूठे निकले वो साथी संगी वो मीत रे,
काम अपना निकला भूले प्रीत रे मेरा संवारा बनेगा मेरी जीत रे,
जग मानो सो छलावे जैसा हो गया,
दिल अपना बहकावे जैसा हो गया,
सब अपना पराये जैसा हो गया ,
मैं तेरी और चलता रहा,
मुझे पग पग छला जग जाल ने,
भला किसी को दिखता या हाल मैं ,
मिले जख्म हजारो विशवास में,
नहीं कोई भी जवाब हो सवाल में,
आस तुझसे लगाई मैंने हार के,
नाव लाया हु मैं बिन पतवार के,
पार करदेगा मुझे मझधार के
जब तेरे जैसा यार मेरे साथ है मेरी जिंदगी में मानो सब ठाठ है
रहे जिंगदी में कमी किस बात की तेरा कस के जो पकड़े हाथ है,
मेरी जिंगदी की तू ही सारी तू ही भोर है ,.
मेरी ख़ामोशी का बस तू ही शोर है,
फिर तू ही आकाश तू ही छोर है,
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