
यह कंचन का हिरण, नाथ हमें लगता प्यारा है,
सर से पैरों तक है सोना, इसकी छाल हमें ला देना,
दीनबंधु भगवान् यही एक अरज हमारी है,
आगे हिरण, नाथ भये पीछे,
एक धनुष का बाण, राम हिरण को मारा है,
मारा बाण लगो, हिरण
हाय लखन, हाय लखन, अंत में राम पुकारा है,
बोली जानकी, सुनो देवर लक्ष्मण,
तुमरे भाई पर विपति जाय, कुछ करो सहारा है,
बोले लक्ष्मण, सुनो भाभी सीता,
तीन लोक के नाथ, उन्हें कौन मारन वाला है,
कटुक बचन, जब बोली जानकी,
धरी धनुहे की रेख चला रघुवंश को मारा है,
इतने में है, आवा रावणा,
धरि भिक्षुक का भेष, सिया को लै लंक सिधारा है,
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