
याद क्यूँ ना आएगी क्यूँ ना मुझे रुलाएगी श्याम
याद क्यूँ ना आएगी,
क्यूँ ना मुझे रुलाएगी,
याद क्यूँ ना आयेगी,
जब तक जियूंगा,
ये अँखियाँ नीर बहाएगी।।
तर्ज – याद तेरी आएगी मुझको बड़ा।
बनके मुसाफिर मारा मारा फिरा,
मंजिले मिली ना रास्ता ना मिला,
अपनों के चक्कर में ऐसा फसा,
मेरी मजबूरियों पे जग ये हँसा,
जग ये हँसा,
मुझको क्या पता था दुनिया,
एक दिन मुझे भुलाएगी,
हार के मैं आखिर जो भी करके गिरा,
देखा बगल में मेरे तू था खड़ा,
अब क्या ज़माने की परवाह मुझे,
सबकुछ मिला है मुझे पा के तुझे,
पा के तुझे,
तेरे होते अब क्या बाबा,
दुनिया मुझे डराएगी,
भूल से भी ना भूल पाउँगा मैं,
जबतक जियूंगा यही गाऊंगा मैं,
‘श्याम’ कहे जो तेरा साथ मिला,
मुझको को भी एक दीनानाथ मिला,
दीनानाथ मिला,
जिस दिन मुझसे तू रूठा तो,
सांस मेरी रुक जाएगी,
अनुज कुमार मीणा
मोब. – 9414695507
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