
रामाधणी दातार म्हारा रूनीचे रा श्याम बाबा
रामाधणी दातार म्हारा,
दोहा – पिछम धरा रा बादशाह,
ओ लीले रा असवार,
धरती राजस्थान री,
थारी बोला जय जयकार।
रूनीचे रा श्याम बाबा,
हो लीले असवार,
रामदेव आवेला जी आवेला,
रामाधणी दातार मारा,
मीठा मीठा भजन सुनावु,
थाने आज रीजावा जी,
वीणा तन्दुरा झालर मजीरा,
हिलमिल आज बजावा जी,
अंतर री बौचार उड रही,
ज्यू अमृत की धार बरसी,
आंगनीये फुवार,
कई दिना सु बीत आया,
भादवा री ऋतु आयी जी,
मीठी मीठी हवा कुरवाई,
यो सन्देशो लायी जी,
भादवा रा दिन चार भगतो,
हो जावो तैयार आयो,
बाबा रो त्यौहार,
रामसा आवेला जी आवेला,
चुन चुन कलीया बागा से मै,
सुन्दर हार बनाया जी,
जूही चम्पा ओर चमेली,
से दरबार सजाया जी,
खूब सजीया दरबार सेवक,
निरखे बारम्बार,
थारी लेवु निजर उतार,
घणा चाव सु ओ मारा बाबा,
छप्पन भोग बनाया जी,
जो थारे मन मे ओ भावे,
रूचि रूचि भोग लगावो जी,
घणी करा मनवार जीमो,
जीमो रामा आप थारा,
भगत खडा दरबार,
प्रेषक – मनीष सीरवी
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