
लगाले प्रेम ईश्वर से,
अगर तू मोक्ष चाहता है।।
रचा उसने जगत सारा,
करे वो पालना सब की,
वही मालिक है दुनिया का,
पिता माता विधाता है,
नहीं पाताल के अंदर,
नहीं आकाश के ऊपर,
सदा पास है तेरे,
कहाँ ढ़ूंढ़न को जाता है,
करो जप तपन भारी,
रहो जाकर सदा वन में,
बिना सतगुरु की संगत के,
नहीं वो दिल में आता है,
पड़े जो शरण में उनकी,
छोड़ दुनिया की लालच को,
ब्रम्हानंद के निश्चय से,
परम सुख धाम पाता है,
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