
लागे प्यारो यो हरबार
लागे प्यारो यो हरबार, आऊँ जद-जद मैं दरबार
लागे प्यारो यो....
दुनिया पे जो हुक्म चलावे-॥, खाटू की सरकार
भांत-भांत की माला पहने, बैठो माल लुटावे से
इतर की खुशबू से महके-॥, थारो यो दरबार
जद जद कोई खाटू आवे, दर पे शीश झुकावे से,
सगला ने यो गले लगावे ॥, यो तो करता प्यार
हारे का यो साथ निभावे, सबकी बिगड़ी बनावे से
महिमा यो "गोपाल" है गावे-॥, थारो यो उपकार
भजन लेखक:-
गोपाल गोयल "श्याम दिवाना"
:- "हमारे दो रिश्तेदार"
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