
विनती मेरी सुन लो श्याम बिहारी जी
विनती मेरी सुन लो,
श्याम बिहारी जी,
आन पड़ा मैं बाबा,
शरण तिहारी जी।।
तर्ज – रेशमी सलवार कुर्ता।
मैं शरण में आया तेरी,
अब मुझको श्याम सम्भालो,
बाबा कोई नहीं है मेरा,
तुम मुझको गले लगा लो,
ओ कृष्ण मुरारी जी,
जिसका ना कोई सहारा,
उसका तू खाटू वाले,
भवरों में अटकी नैय्या,
मैंने कर दी तेरे हवाले,
ओ बाँके बिहारी जी,
मैं मूर्ख हूँ अज्ञानी,
गलती पे ध्यान ना देना,
जब गिरने लगू मैं बाबा,
मेरी बाँहो को थाम लेना,
ओ मेरे गिरधारी जी
‘रूबी रिधम’ दुखों से हारे,
अब और परीक्षा ना लो,
मुझे दर का बना लो सेवक,
अपने चरणों मे जगह दो,
ओ लखदातारी जी,
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