
एक दिन भोले शंकर ने कही,
गौरा से बात एक गेहरी,
हो एक दिन भोले शंकर ने कही,
तुम ध्यान हमारा रखती हो,
हम तीनों लोको के पेहरी,
तुमने इस फक्कड़ जोगी का,
यूगो यूगो के योगी का,
संसार संवार दिया है....
सुनो जी, सुनो जी,
सुनो ये बात जी,
अमर ये साथ जी,
तुम्हारे संग सदा,
हे भोलेनाथ जी……
सुनी थी कुटिया मेरी,
सुना कैलाश था,
जब ना तुम्हारा यहा वास था……
गंगा जाटों से ना ऐसे बही कभी,
चंदा में इतना ना प्रकाश था,
मेहलो के इस भो को ठुकरा के,
ओघड़ का आँगन अपना के,
तुमने उपकार किया है....
तुम शिव की शक्ति प्रिय,
तुम स्वाभिमान हो,
शिवानी शिवा की शान हो....
तुम बिन गुज़ारा नही,
गोरी मीरा की ही,
तुम आत्मा हो प्राण हो…..
संभव ना था तुम बिन ऐसा,
गणपति कार्तिक के जैसा,
तुमने उपहार दिया है….
एक दूसरे मैं गौरी,
शंकर समा गये,
कहे अधनारेश्वर सभी…..
बाँधा है तुमने हमे,
भावना की डोर से,
ठेहरे कहा थे हम कभी…..
हम तो थे मस्त मलंग गौरी,
नंदी ही था संग गौरी,
तुमने परिवार दिया है….
कर्पूरगौरं करुणावतारं, संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्,
सदावसन्तं हृदयारविन्दे, भवं भवानीसहितं नमामि।
शिव शक्ति साथ हाथों में हाथ,
गौरी भोली भोले है नाथ,
दोनो का प्रेम है अजर अमर,
माने सारा संसार आज…
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