
शांतिनाथ जी सतगुरु थाने,
विनती बारम्बार,
हाथ सिर धर दीजो,
पार भव कर दीजो,
तर्ज – राम मेरे घर आना।
आप राठौड़ कुल में हुआ तपधारी,
हुआ तपधारी,
बालपना सु भक्ति हिया माई धारी,
हिया माई धारी,
गुरू सु पायो ज्ञान,
आपरा सतगुरु केसर नाथ,
नाथा री गादी माथे आप बिराजो,
आप बिराजो,
दीन दुखी रा सारा कारज सारो,
कारज सारो,
महिमा है अपरम्पार,
आपने पूजे नर ओर नार,
नाथ जलंधर जी रा मिन्दर बनाया,
मिन्दर बनाया,
कई गाँवा मे ज्यारा पगल्या थपाया,
पगल्या थपाया,
किया घणा उपकार,
आपरी होवे जय जयकार,
दास अशोक सतगुरु अरजी सुनावे,
अरजी सुनावे,
चरना मे थारे दाता शिश नमावे,
शिश नमावे,
नाव पडी मजधार आपरे,
हाथ म्हारी पथवार,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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