
शिव का रूप सलोना भेरव देता सब सोगाते
दर्शन मात्र से पूरी होती सब की सारी मुरादे,
तीन लोक में डंका बाजे तीन नेत्र वाले भेरव का
इनसे बड़ा फ़कीर न कोई शानी नही इनके भेभ्व का
मन की बात पूरी करदे मन की बात पहचाने
भक्त जो इनके मन भा जाए उनको न कोई जग में रोके
अंत समय जो काशी जाए परम धाम को वो तो पोंछे,
काशी नगरी पूरी करदे भगत जो सपने संजोते
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