
सुमिरन बिन सुन्दर काया,
कहो सजन किस काम की,
सुमिरण बिन सुन्दर काया।।
सुन्दर तन हरि में नहीं सुरती,
जैसे बनी पत्थर की मुर्ती,
भुसती कुतिया गांव की,
भुस भुस के नगर जगाया,
दिपक बिना सोभा ना भवन की,
धर्म बिना सोभा ना धन की,
अपने स्वार्थ कारणे,
नर तजदा माल पराया,
ज्ञान सुणिया बिना श्रवण कैसा,
भुमि बीज पड़िया बिन जैसा,
तुझे कदर नही है काम की,
नर बिरथा जन्म गमाया,
कहे सुखराम पार जायेगा कबतक,
जिवणो हे साँसों के अबलक,
थारी काया पुतली चाम की,
काँई अमर पटा लिखवाया,
प्रश्न 1:
‘सुमिरन बिन सुन्दर काया’ भजन का क्या अर्थ है?
उत्तर:
इस भजन का मतलब है कि बिना ईश्वर के स्मरण के शरीर चाहे कितना भी सुंदर हो, उसका कोई महत्व नहीं। असली सुंदरता आत्मा की होती है।
प्रश्न 2:
यह भजन किसने लिखा है?
यह भजन पारंपरिक भक्ति साहित्य का हिस्सा है और कई संतों द्वारा इसे प्रचारित किया गया है।
प्रश्न 3:
भजन को कहां और कैसे सुन सकते हैं?
आप इस भजन को यूट्यूब, गाना, स्पॉटिफाई और अन्य भक्ति संगीत ऐप्स पर सुन सकते हैं।
प्रश्न 4:
क्या इस भजन के साथ अर्थ भी उपलब्ध है?
हाँ, भजन के साथ आमतौर पर हिंदी में अर्थ और व्याख्या भी दी जाती है ताकि भाव को बेहतर समझा जा सके।
प्रश्न 5:
क्या यह भजन किसी विशेष अवसर पर गाया जाता है?
यह भजन मुख्य रूप से भक्ति कार्यक्रमों
और आध्यात्मिक आयोजनों में गाया जाता है।
प्रश्न 6:
सुमिरन बिन सुन्दर काया भजन सुनने के क्या लाभ हैं?
इस भजन को सुनने से मानसिक शांति मिलती है, मन को स्थिरता मिलती है और ईश्वर की याद आती है।
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