
शेरों पे हो के सवार,
देखो जी शेरोंवाली आई है
ऊँचे परबत पे, माँ का दरबार,
बाण गंगा, सबसे पहले है आई,
भक्तों ने उसमे जो, डुबकी लगाई
सारे कष्टों का
हो गया उद्दार,
आगे गुलशन जी का, लँगर है आया,
भक्तों ने लँगर, जब जी भरके खाया
सब भक्तों को
देनेअपना प्यार,
भक्तों ने फिर से है, करदी चढ़ाई,
आगे चरण, पादुका माँ है आई
अपने चरणों का
देने आशीर्वाद,
भक्तो ने फिर से जो, करदी चढ़ाई,
आगे माँ अर्ध, कुँवारी जी आई
गर्भ योनि से
निकले जो उस पार,
भक्तो ने माँ की जब, महिमा है गाई,
माँ वैष्णो सबको, दीपव दिखाई
लक्ष्मी काली
सरस्वती अवतार,
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