
जाओ मेरे हनुमान बूटी ले आओ
जाओ मेरे हनुमान बूटी ले आओ ।
लखन के राखो प्राण बूटी ले आओ ।।
मेरी आँखों का तारा,
भूमि पे गिरा बेचारा,
वो मुख से कुछ ना बोले,
वो नैन ना अपने खोले ।
जान को बचा आओ,
मैं क्या मुँह लेकर अपना,
अयोध्या को जाऊंगा,
मैया से कैसे आंखे,
मैं अपनी मिला पाऊगा ।
बात बतला जाओ,
हे कुल के देवता सूरज,
तुम उदय नही हो जाना,
तुम उदय हुए तो निशिचत,
मेरे प्राणों का जाना ।
ये संकट हर जाओ,
लगा चरण धुली से चंदन, हनुमत बूटी ले आए,
प्रभु राम की लाज थी राखी ।
लक्ष्मण के प्राण बचाए, वो काज बनाए,
बूटी वाला पर्वत हनुमत लाए है ।।
राम प्रभु के काज सारे बनाये है,
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