
श्याम पे भरोसा है
श्याम पे भरोसा है,
फिर काहे घबराते हो,
सांवरे के रहते तुम,
काहे घबराते हो,
तुम्हें छोड़ के जो गया ही नहीं,
उसे काहे बुलाते हो,
सूखते नहीं है प्रभु,
ये हाथों के छाले मेरे,
नाव खैने से फुर्सत नहीं,
कब मरहम लगाते हो,
तुम्हें छोड़ कर के भक्तों को,
कभी जाते नहीं देखा,
फिर भी कहते हैं भक्त तेरे,
तुम देरी से आते हो,
जो कुछ भी पास तेरे,
तुने मेहनत से कमाया है,
अपनी सारी कमाई प्रभु,
तुम भक्तों पे लुटाते हो,
काम भक्तों का इतना प्रभु,
तुम्हें बनवारी फुर्सत नहीं,
इसलिये काम खुद का,
तुम भक्तों से कराते हो,
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