
श्याम मैंने जीवन किया तेरे नाम,
दोहा – कोशिश करके हार गई,
तुम ना आए कृष्ण मुरारी,
दिल की लगी नहीं बुझती,
रोती है राधा प्यारी।
मैं हो गई दीवानी,
अपने हाथों में मेरा हाथ थाम,
ओ श्याम,
जिसने हमें हंसाया जिसने रुला दिया,
जिनके कारण हो गई हूँ बदनाम,
तर्ज – सौलह बरस की।
ऐ वृक्ष ऐ लता,
चुप क्यों है तू बता,
घनश्याम मेरा मुझसे,
क्यों हो गया जुदा,
तेरी डाल पर वो हरदम,
मुरलिया बजाता था,
मुरलिया की तान पर वो,
हमको नचाता था,
तू ही बता दे भवरे,
कहाँ खो गए मोरे श्याम,
पि रही हूँ गम के भर भर के जाम,
यशोदा का लाला रोज,
मेरे घर आता था,
सखाओं के संग मिलकर,
वो माखन चुराता था,
जाती थी पनिया भरने,
जब मैं जमना घाट पर,
कंकरिया मार गगरी,
मोरी फोड़ जाता था,
बड़ा ही सताता था वो,
बिच राह रोक कर,
अखियां दिखाए मोरी,
बइयां मरोड़ कर,
करुणा के सागर तुम ही,
कुछ तो बताओ उनका धाम,
मैं बहुत ही हो रही हूँ परेशान,
किसको सुनाऊँ अपने,
दर्दे दिल की दास्ताँ,
कोई तो बताए प्यारे,
मोहन का रास्ता,
कैसा ये भगवन राधा,
का इम्तेहान है,
दो दर्शन आके दिल का,
यही अरमान है,
मत पीछे रोना प्रिये,
कसम मुझको दे गया,
लूटी सारी खुशियां मेरी,
गम मुझको दे गया,
कथा श्याम राधा की,
‘कामेश’ करता है बखान,
ढूंढता है इनके चरणों के निशान,
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