
हिंडो घला दयो ओ सत्संग माई ने,
दोहा – सतगुरु के दरबार में,
नर जाइए बारंबार,
भूली वस्तु बताएं दी,
मेरे सतगुरु दातार।
ओ गुरूजी हिंनडे हिंनडे सुरता नार,
अो सतगुरु जी महारा,
हिंनडे हिंनडे सुरता नार।।
काया मंदिर में आमली ओ गुरूजी,
छाई छाई घेर घुमेर,
सतगुरु जी महारा,
हिंडो घला द्यो ओ सत्संग माई ने,
अगड चन्दन रो पलनो ओ गुरूजी,
घाली घाली रेशम डोर,
सात सहेलियां जूल री ओ गुरूजी,
गावे गावे मंगला चार,
नाथ गुलाब की विनती या गुरुजी,
गावे गावे बाने भोला नाथ,
ओ सतगुरु जी महारा,
गावे भोला नाथ।।
– भजन गायिका –
रामीबाई।
– भजन प्रेषक –
सुरेश खोड़ा जयपुर।
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