
श्याम सुन्दर और कब तक चुप रहे,
हो इजाजत आपकी तो कुछ कहे,
तर्ज – दिल के अरमा आंसुओ में।
जिंदगी दुःख दर्द से बेहाल है,
तुम ही सोचो और कितने गम सहे,
नांव हिचकोले नहीं सह पाएगी,
गहरी नदिया जोर से धारा बहे,
आपको मालूम है मजबूरियां,
दिल की बाते आपको अब क्या कहे,
नाव छोड़ी आपके विश्वास पर,
‘बनवारी’ मझधार में ही रह गए,
स्वर – संजय मित्तल जी।
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