
सजा कर शेर मेरे घर आ,
मै बैठा दिल का आसन सजा,
मन का आसन कबसे है खाली,
आन विरोजो माँ मन्दिरो वाली,
तुम बिन ओर बसे ना कोई,
मेरे मन मंदिर में आ,
पाप मिटा दो गिन गिन मेरे,
काम क्रोध में लाये डेरे,
अवगुण मेरे चित ना बसाओ,
दो चरणो मे जगह,
लग जाये मेरी ऐसी समाधी,
मन में रहे ना कोई व्याधी,
हर पल तेरा नाम जपु मै,
ऐसी करो कृपा,
कण कण दर्शन करू तुम्हारा,
रोम रोम बोले जयकारा,
ध्यानु सा विश्वास जगा दो,
हम पे करो कृपा,
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