
सजी है अयोध्या नगरीया,
मेरे राम पधारे,
राम पधारे मेरे राम पधारे,
बाजत है ढोल नगड़िया,
तर्ज – सावन की बरसे।
सूरज चंदा आरती उतारे,
माँ गंगा भी चरण पखारे,
सजी हैं सारी डगरिया,
जगमग जगमग दीप जले है,
रंग बिरंगे देखो फूल खिले है,
कुकू करती कोयलिया,
राम नाम की प्रीत लगाए,
‘सोनू’ सबको ये समझाए,
‘नागर’ की भीगी नजरिया,
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