
सतगुरु सेन बताय असल निज सार की भाई साधु
असल निज सार की भाई साधु,
सतगुरु सेन बताय,
सुरता शब्द विचार नुरत घर,
पहरा दीना,
पाँच पचीस ने मार,
अगम का मार्ग लीना,
अब जागो जागण देश में,
निर्भय गहरे रे निशान,
सात द्वीप नव खण्ड में रे,
नही शशि नही भान,
अब घटा चढ़ि घनघोर,
बरसे कोई अम्रत धारा,
पीवे संत सुजान हरि का,
हरि जन प्यारा,
जन्म मरण आवे नही,
आवा गमन मिट जाय,
अटल धाम पर जा टिके रे,
संत अमर हो जाय,
कैसा ये देश गुरु का,
ऐसा कहिये,
वहां पर होत उजाला,
उजाला घट माय,
मेहर हुई गुरुदेव की रे,
कर लिया रे बखान,
सतगुरुसा सुखदास,
नवलगुरु ब्रह्म समाना,
बैठा आसन ढाल,
मुगत का देने वाला,
शरण कमल के मायने,
बोले ब्रह्म समाय,
बाहुबल तेरा टाल दी,
अगम निगम है अपार,
गायक / प्रेषक – श्यामनिवास जी।
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