
सतसंग वाली नगरी चल रे मना,
पी ले राम जी के चरणों का तूँ जल रे मना,
चल रे मना, चल रे मना,
सतसंग वाली नगरी................
इस नगरी में प्रेम की गँगा,
जो भी नहाए हो जाए चंगा,
मल मल के तूँ निर्मल कर रे मना,
सतसंग के है अज़ब नज़ारे,
बहुत सुहाने बहुत ही प्यारे,
पी ले सुख और शांति का फल रे मना,
सतसंग का है संग निराला,
मनमंदिर में जो करे उजाला,
अपने जीवन को सफल तूँ कर रे मना,
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