
सब छोड़ शरण में आ तू श्याम की
जग में हार मिले तुझको,
वक्त की मार पड़े तुझको,
सब छोड़ शरण में आ,
तू श्याम की,
गर तेरी लाज बचानी हो,
या बिगड़ा काज बचाना हो,
तर्ज – जब कोई बात।
हो जब चारो ओर अँधेरा,
कोई मिले ना साथी तेरा,
विश्वास श्याम पे रखना,
ना फिरना डेरा डेरा,
रोशन हो जाएगा,
फ़ौरन हो जाएगा,
राहों में जो हो उलझन,
पल में सुलझ जाएगी,
तुझे श्याम के चरणों में,
तेरी मंजिल मिल जाएगी,
तक़दीर बदलनी हो,
तदबीर बदलनी हो,
खाटू से बैठे बैठे,
सरकार चलाता है,
‘बिट्टू’ तू फिकर ना करना,
परिवार चलाता है,
तुझको संभालेगा,
जीवन संवारेगा,
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