
सात समंदर लांघ के हनुमत
सात समंदर लांघ के हनुमत लंकानगरी आ गए,
हनुमत लंकानगरी आ गए….
ऐसा किया कमाल देखकर लंकावासी डर गए,
लँकापुर पहुंचे हनुमत जी, किया प्रभु का ध्यान,
मात सिया को खोजे पवनसुत लंका में अनजान,
असुरों संग बैठी मेरी माँ ये देख क्रोध में आ गए,
राम निशानी लिए पवनसुत पहुंचे माँ के पास,
देख निशानी जनकनन्दिनी व्याकुल भई उदास,
हनुमत मेरे प्राण….
हनुमत मेरे प्राणनाथ को छोड़ कहाँ तुम आ गए,
भूख लगी ले आज्ञा पवनसुत चले बगिया की और,
तोड़ तोड़ फल खाने लगे और फेंके चारों और,
देख तबा ही…
देख तबाही बगिया की रावण के सैनिक आ गए,
बनाके बंदी रावण सन्मुख खूब किया अपमान,
सहन हुआ नही रावण से लगवा दी पूंछ में आग,
क्रोधित बजरंगी…….
क्रोधित बजरंगी लंका में आग लगाके आ गए,
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