
सानूं यमुना दे कंडे ते बुलाके / ਸਾਨੂੰ ਯਮੁਨਾ ਦੇ ਕੰਢੇ ਤੇ ਬੁਲਾ ਕੇ
सांनूं यमुना दे कंढे ते बुला के
ओ शाम मांएं, कित्थे रहि गया ॥
साडी, अखियां चों, नींदरां उड़ा के,
सांनूं, वृंदावन... जय हो ॥ आप, बुला के,
उड़दा, दुपट्टा मेरा, मल्ल मल्ल दा ।
दिल उत्ते, ज़ोर मांएं, नइयों चलदा ।
हार के, मनावांगी मैं, हथ जोड़ के ।
सांवरें ने, गुस्सा कीता, केहड़ी गल्ल दा ।
साडे, पैरां विच... जय हो ॥ बेड़ियां पा के,
थक्क गई, दुनिया ते, पुछ पुछ के ।
गल्लां, इस जग्ग दियां, सुण सुणके ।
बड़ा तंग, कीता मैनूं, तूं श्यामा वे ।
तेरे मैं, बहाने श्यामा, सुण सुणके ।
सांनूं, प्यार वाली... जय हो ॥ पौड़ी चढ़ा के,
सुध-बुध, आई श्यामा, रंग रंगण दी ।
दिल तैनूं, पुछदा ए, अख तकदी ।
ओ मुल्ल, केहड़ा पाया ए तूं, साडे प्यार दा ।
ओ हर पल, तेरीयां मैं, खैरां मंगदी ।
सांनूं, प्यार वाले... जय हो ॥ लेखे ला के,
अपलोडर — अनिलरामूर्ति, भोपाल
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