
सालासर में ऐसा एक सरदार है,
जिसके आगे झुकता ये संसार है,
सच्ची सरकार है सच्चा दरबार है,
तर्ज – काली कमली वाला मेरा।
राम नाम की अमर कहानी,
जपे निरंतर वो बलवानी,
इनकी भक्ति का पाया ना पार है,
भूत पिशाच भी दर पे नाचे,
घर घर इनका डंका बाजे,
हनुमान का मन भावन दरबार है,
दो चुटकी सिंदूर जो लाये,
बाला उनसे खुश हो जाये,
बिना कहे ही भर देते भंडार है,
चैत्र सुदी पूनम का मेला,
लगता है भक्तों का रेला,
दूर दूर से आते नर और नार है,
कहता ‘शिवम’ इनको मनालो,
मन चाहा वर इनसे पा लो,
पल में करते भक्तो का उद्धार है,
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