
हनुमान चले आओ तुम्हे राम बुलाते है
हनुमान चले आओ,
तुम्हे राम बुलाते है।
श्लोक – आज सारे रामादल में,
शोक ऐसा छा गया,
राम बोले ऐ लखन,
क्यूँ नींद गहरी सो गया,
हिम्मत टूटी किस्मत फूटी,
छूटे सभी सहारे,
लगे बुलाने हनुमत को की,
आओ आओ प्यारे।
लक्ष्मण पर संकट के,
बादल मंडराते है,
दुनिया तो कहेगी ये,
कैसा है बड़ा भाई,
कुर्बान किया इसने,
पत्नी के लिए भाई,
ये दर्द भरे ताने,
मुझको तो रुलाते है,
ऐ रात ठहर जा तू,
ना मुझसे दगा करना,
सूरज ना उदय होवे,
कुछ ऐसा यतन करना,
अपने ही मुसीबत में,
दुःख दर्द बंटाते है,
है कौन सी वो बूटी,
हनुमत ना समझ पाए,
क्या तोडूं क्या छोडूं,
कुछ सोच नहीं पाए,
फिर राम सुमिर करके,
पर्वत ही उठाते है,
लाकर के संजीवन को,
लक्ष्मण को बचाया है,
सेवक की देख भक्ति,
छाती से लगाया है,
‘नरसी’ सेवक स्वामी,
फिर नीर बहाते है,
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