
सिया राम जी का डंका लंका में,
बजवा दिया बजरंग बाला ने,
वो माँ अंजनी के लाला ने,
तर्ज – दिल लूटने वाले जादूगर।
सूती मंडोतरी सपनो आयो,
सपनो विस्वा विस रे
कूदता देखिया रीछ बानरा ने,
कटता देखिया सीस रे,
केवे मंदोतरी सुन पिया रावण,
आ कई कुबुद्ध कमाई रे,
तीन लोक री सीता माँ जानकी,
ज्याने तू हर लाइ रे,
मेघनाथ सा पुत्र हमारे,
कुम्भकरण सा भाई रे,
लंका सरीका कोट हमारे,
साथ समुद्र आडी खाई रे,
हनुमान सा पायक उनके,
लक्ष्मण जैसा भाई रे,
जलती अग्न में कूद पड़े वो,
कोट गिने ना खाई रे,
रावण मार राम घरे आये,
घर घर बटत बधाई रे,
सुनीजन मुनिजन आरती उतारे,
तुलसीदास जस गाई जी,
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