
सुन यशोदा तेरो लाला
सुन यशोदा तेरो लाला पनघट पे मारे कंकर,
झट दौड़ आयो वो मटकी फोड़ आयो ।
समझाई ले कान्हा कूँ तेरो लाला बड़ो नटखट,
पहले तो यह बंसी बजाता है फिर सुध-बुध को बिसराता है,
जमुना पे बुलाकर हम सबको तेरा कान्हा खूब सताता है ।
वो करके बरजोरी राधा की तो कलाई वो मरोड़ आयो,
वो मटकी फोड़ आयो...
सुन यशोदा......
सूने घर में यह जाता है फिर माखन मिश्री चुराता है,
अपना खाए सो खाए ये ग्वालों को खूब खिलाता है ।
छींके पे धरी मटकी झपटके जो पटकी झट तोड़ आयो,
स्वर:गिरधर महाराज
भाटापारा छत्तीसगढ़
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