
सोनाला रो टिकट कटायो म्हारी गोरी,
आपा बैठ आपा बैठ मोटर मे चाला रे,
म्हारी प्यारी गोरडी,
आपा बैठ मोटर मे चाला रे,
साचा मनसु जो कोई जावे,
भेरूजी ने शिश नमावे,
भेरू भगता भेरू भगता रे वेले आवे रे,
भेरू भगता रे वेले आवे रे,
सारंगवा मे बनीयो मिन्दरीयो,
सोनाला मे बनीयो मिन्दरीयो,
आपा धोक आपा धोक लगावन चाला रे,
आपा धोक लगावन चाला रे,
आंधा आवे लुला आवे,
बांजनीया री गोद भरावे,
भेरू सबरी भेरू सबरी आस पुरावे रे,
भेरू सबरी आस पुरावे रे,
जात जडूला धोक लगावे,
दुखीया रा भेरू कष्ट मिटावे,
सुख संपत्ति सुख संपत्ति होय जावे रे,
सुख संपत्ति होय जावे रे,
अर्जुन राव भजन सुनावे,
भक्त मंडली शिश नमावे,
थारो हरख थारो हरख निरख गुण गावे रे,
थारो हरख निरख गुण गावे रे,
गायक – प्रकाश माली जी।
प्रेषक – मनीष सीरवी
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