
सौदा करले जाननहार,
काया गढ़ में मंडियों बाजार,
इन काया मे हाट लगाकर,
बैठा है सहुकार,
इन काया मे चोर बसत है,
लूटे सरे बाजार,
इन काया मे हिरा निपजे,
लाला रो बिनज अपार,
इन काया मे रत्न निपजे,
परखे परखनहार,
इन काया मे वेद ने शास्त्र,
पंडित करे विचार,
इन काया मे काजी मुल्ला,
दे दे बांक पुकार,
इन काया मे गुरू बिराजे,
ज्यारी ओट अपार,
कहत कबीर सुनो भई संतो,
कहत कबीर सुनो भई साधो,
हरि भज उतरो पार,
गायक – मोईनुद्दीन जी मनचला।
प्रेषक – मनीष सीरवी।
(रायपुर जिला पाली राजस्थान)
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