
हंसा सुन्दर काया रो,
मत करजे अभिमान,
आखिर एक दिन जाणो रे,
मालिक रे दरबार,
सायब रे दरबार।।
गरब वास मे दुख पायो,
जद हरि से करी पुकार,
पल भर बुलु नाहि रे,
कोल वचन किरतार,
हंशा सुन्दर काया रो,
आकर के संसार मे,
कभी ना भजियो राम,
तिरथ वरत ना किनो रे,
नही कीनो सुकरत काज,
कुटम कबिलो देख के,
गरब कीयो मन माय,
हंश अकेलो जासी रे,
कोय नही संग मे जाय,
राम नाम री बान्ध गाठडी,
कर ले सुकरत कार,
कहै कबीर सुनो भाई साधु,
आखिर आसी राम,
– यह भजन ताराचंद जी
7734893189 द्वारा,
राजस्थानी भजन डायरी से,
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