
हर नगर नगर और डगर डगर,
हम जहाँ भी द्रष्टि डाले,
मेरे बाबा के है शिवाले,
शिव शंकर के है शिवाले।।
ॐ नमः शिवाय, ॐ नमः शिवाय,
तर्ज – जहाँ डाल डाल पर।
गर भक्ति भाव से एक पत्थर भी,
कोई पूजता जाए,
हरी ॐ हरी ॐ, हरी ॐ हरी ॐ,
आकर के समाते उमसे बाबा,
वो शिव लिंग कहाए,
ये तेरे ऊपर ही है भगत,
तू जहाँ भी इनको बसा ले,
है कहीं पे शिखर गगनचुम्बी कहीं,
छोटा सा है शिवाला,
कहीं पेड़ तले बिन दीवारों के,
बैठा भोला भाला,
छोटा हो चाहे बड़ा हो मंदिर,
सब मे है डमरू वाले,
है कई शिवालय जंगल में,
जहाँ मानव जा ना पाए,
बादल करते अभिषेक शिवम का,
पवन है झाड़ू लगाए,
और पेड़ फुल फल अर्पण करते,
कुदरत पूजे शिवाले,
कहे ‘पवन’ की शिव पूजा करने को,
शिवालय अगर ना पाओ,
अपने इक हाथ की मुठ्ठी भीचकर,
अंगूठा जरा उठाओ,
और उसको शिवलिंग मान के पूजो,
अंग संग चले शिवाले,
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